जब शब्द मौन हो जाते हैं और भाव भक्ति में ढल जाते हैं, तब हृदय से केवल एक ही स्वर उठता है—“हर हर महादेव।”
शिव-स्तुति
अनादि, सिद्ध, परमेश्वर,
कल्याणकारी शिव महेश्वर।।
तप, बल, त्याग, करुणा,
अखंड है आपका धारणा।।
पंचदेवों में प्रधान, हे! दयानिधान!
भला आपका क्या बखान?
देव, दनुज, मनुज, सायुज्य,
योगीन्द्र, मुनिन्द्र, सिद्ध, गंधर्व ही नहीं,
ब्रह्मा, विष्णु संग, गण देव गणेश,
साधक बने स्तुति गाए सब अनेक।।
सात संहिताओं युक्त, दिव्य है आपका शिवपुराण।
मंगल, शुभ, दिव्य, सहज, श्रेष्ठ है आपका ज्ञान।।
हे! परमतत्व, अजन्मा, विश्वपंच, संहारक
करो सिद्ध उपासना मन धारक,
खड़े है द्वार पर आसनबद्ध हारक।।
हे! त्रिनेत्र, त्रिपुरारी, त्रियम्बकं, कैलाशपति
वाक्यस्वरूप, त्रिभुवन, कल्याणकारी,
दया करो निधान!
कर मनोवांछित फल प्रदान।।
निर्बल, दुर्बल, मरियल, शक्तिहीन,
सब है आपमें ही लीन।
आपदा का करो निदान,
दे दो अपना संहारक दान,
हो जाए सबका कल्याण।।
-गौतम झा
शिव-स्तुति
अनादि, सिद्ध, परमेश्वर,
कल्याणकारी शिव महेश्वर।।
तप, बल, त्याग, करुणा,
अखंड है आपका धारणा।।
पंचदेवों में प्रधान, हे! दयानिधान!
भला आपका क्या बखान?
देव, दनुज, मनुज, सायुज्य,
योगीन्द्र, मुनिन्द्र, सिद्ध, गंधर्व ही नहीं,
ब्रह्मा, विष्णु संग, गण देव गणेश,
साधक बने स्तुति गाए सब अनेक।।
सात संहिताओं युक्त, दिव्य है आपका शिवपुराण।
मंगल, शुभ, दिव्य, सहज, श्रेष्ठ है आपका ज्ञान।।
हे! परमतत्व, अजन्मा, विश्वपंच, संहारक
करो सिद्ध उपासना मन धारक,
खड़े है द्वार पर आसनबद्ध हारक।।
हे! त्रिनेत्र, त्रिपुरारी, त्रियम्बकं, कैलाशपति
वाक्यस्वरूप, त्रिभुवन, कल्याणकारी,
दया करो निधान!
कर मनोवांछित फल प्रदान।।
निर्बल, दुर्बल, मरियल, शक्तिहीन,
सब है आपमें ही लीन।
आपदा का करो निदान,
दे दो अपना संहारक दान,
हो जाए सबका कल्याण।।
-गौतम झा
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