सुल्तान-ए-धुआँ: एक राजनीतिक व्यंग्य कविता
- Poems
- 7th July 2026
सुल्तान-ए-धुआँ ताज पहनकर बैठा है,पर चेहरों पर धूल बहुत,वादों की ऊँची...
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सुल्तान-ए-धुआँ ताज पहनकर बैठा है,पर चेहरों पर धूल बहुत,वादों की ऊँची...
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एक शाश्वत सत्य अंततः राम त्याग ही देते हैं सीता को,कर्तव्य की वेदी...
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इतिहास के पन्नों का सच इतिहास के पन्नों पर यह दौर भी दर्ज़ होगा,सच...
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नागरिकता हाथ में लेकर खड़े हैं हम प्रमाण-पत्र कई,पर सवाल उठा है ऐसा,...
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त्रिधारा मन के आदिम मरुस्थल में, अंकुर तीन पनपते हैं,इन्हीं तंतुओं...
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मौन की गूंज जो कहते थे वह मौन रहा,इतिहास बताना भूल गए,वे संकट की काली...
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पिता का ऋण इस कलम से जो लिखा, वो तेरी कहानी है,मौन त्याग, मर्म और प्रेम...
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वेदों का संदेश वेदों की ऋचाएँ कहती हैं—यह भूमि हमारी माता है,हर...
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तस्वीर की ओट रात के गहरे सन्नाटे में, जब सो जाता है जग सारा,एक जीव...
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पण्य और प्रतिज्ञा प्रपंच नहीं, यह यथार्थ है—कि जग में छल का अभाव...
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