कभी-कभी अपनी ही तकलीफ़ वह दवा बन जाती है, जो दुनिया के दिए ज़ख्मों को सहने का हौसला देती है।
उदास मन
क्यों उदासी की ये गहराई आज बढ़ती जाती है,
किसकी है ये याद, जो दिल पर चढ़ती जाती है।
सुन ले, रख इत्मीनान, तमाम दर्द की वजहें,
हिम्मत मेरे कानों में कुछ कहती जाती है।
कर ऐतबार, देख लिया है क्या रंग-ए-ज़माने का,
एक हुजूम रोता है, तो एक भीड़ मुस्कुराती है।
ज़ख्मों को हवा देने वाले बहुत हैं यहाँ,
अपनी ही तकलीफ़ मेरी दवा बन जाती है।
यहाँ कोई नहीं आता आँसू पोंछने,
ख़ुदगर्ज़ी में दुनिया बस हाथ बढ़ाती है।
उदास मन
क्यों उदासी की ये गहराई आज बढ़ती जाती है,
किसकी है ये याद, जो दिल पर चढ़ती जाती है।
सुन ले, रख इत्मीनान, तमाम दर्द की वजहें,
हिम्मत मेरे कानों में कुछ कहती जाती है।
कर ऐतबार, देख लिया है क्या रंग-ए-ज़माने का,
एक हुजूम रोता है, तो एक भीड़ मुस्कुराती है।
ज़ख्मों को हवा देने वाले बहुत हैं यहाँ,
अपनी ही तकलीफ़ मेरी दवा बन जाती है।
यहाँ कोई नहीं आता आँसू पोंछने,
ख़ुदगर्ज़ी में दुनिया बस हाथ बढ़ाती है।
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