क्या चाँद सिर्फ़ आसमान का एक चमकता गोला है, या इंसानी सपनों, प्रेम, विश्वास और विज्ञान की उड़ान का प्रतीक? इस कविता में खोजिए चाँद का एक नया अर्थ।
कैसा है चाँद?
संज्ञा यह विशेष है,
सार्थक इसका संदेश है।
रात का यह फ़क़ीर है,
शाम की एक लकीर है।।
जीवन का वेश नहीं,
अपना कोई देश नहीं।
पानी का अवशेष नहीं,
फिर भी कोई क्लेश नहीं।।
प्रेम की यह आस है,
दूरी का एहसास है।
मधुर-सा विश्वास है,
मन का एक प्रकाश है।।
फूल नहीं, पत्ती नहीं,
रंग नहीं, न ही वसंत।
फिर भी सबको भा गया,
चाँद बना है अनंत।।
मोदी का यह विज़न है,
अब चाँद भी मिशन है।
दक्षिण ध्रुव की धरती पर,
तिरंगे का अभिनंदन है।।
चाँद नहीं अब दूर है,
रास्ता थोड़ा ज़रूर है।
विश्वास है विज्ञान पर,
हर सपना भरपूर है।।
गौतम झा
कैसा है चाँद?
संज्ञा यह विशेष है,
सार्थक इसका संदेश है।
रात का यह फ़क़ीर है,
शाम की एक लकीर है।।
जीवन का वेश नहीं,
अपना कोई देश नहीं।
पानी का अवशेष नहीं,
फिर भी कोई क्लेश नहीं।।
प्रेम की यह आस है,
दूरी का एहसास है।
मधुर-सा विश्वास है,
मन का एक प्रकाश है।।
फूल नहीं, पत्ती नहीं,
रंग नहीं, न ही वसंत।
फिर भी सबको भा गया,
चाँद बना है अनंत।।
मोदी का यह विज़न है,
अब चाँद भी मिशन है।
दक्षिण ध्रुव की धरती पर,
तिरंगे का अभिनंदन है।।
चाँद नहीं अब दूर है,
रास्ता थोड़ा ज़रूर है।
विश्वास है विज्ञान पर,
हर सपना भरपूर है।।
गौतम झा
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