माँ दुर्गा की महिमा, उनके दिव्य स्वरूप और असीम कृपा को समर्पित यह मधुर भक्ति-गीत हर भक्त के मन में श्रद्धा, शक्ति और भक्ति का संचार करता है।
जय माँ दुर्गा — भक्ति-गीत
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
सती भवानी, भवमोचनी माँ,
तू दुखियों की पालनहारी।
त्रिनेत्रधारी, शूलधारिणी,
तू भक्तों की रक्षक प्यारी॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
ब्राह्मी, वैष्णवी, चामुण्डा,
लक्ष्मी, वाराही, कौमारी।
अनेक रूप हैं, एक तू माता,
तू ही जग की पालनहारी॥
महिषासुर का दर्प मिटाया,
शुम्भ-निशुम्भ को धूल चटाया।
चण्ड-मुण्ड का अंत किया माँ,
मधु-कैटभ का मान मिटाया॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
कन्या, युवती, माता रानी,
हर छवि तेरी अति कल्याणी।
कालरात्रि हो या कात्यायनी,
महिमा तेरी जग से निराली॥
धन-धान्य और सुख-संपत्ति दे,
भर दे खुशियों से घर-द्वार।
सिद्धि मिले और मुक्ति मिले माँ,
कर दे भवसागर से पार॥
जो भी तेरा नाम पुकारे,
उसके कष्ट मिटाती हो।
जो श्रद्धा से शीश झुकाए,
उसकी झोली भर जाती हो॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
जय हो अम्बे, जय माँ भवानी॥
- गौतम झा
जय माँ दुर्गा — भक्ति-गीत
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
सती भवानी, भवमोचनी माँ,
तू दुखियों की पालनहारी।
त्रिनेत्रधारी, शूलधारिणी,
तू भक्तों की रक्षक प्यारी॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
ब्राह्मी, वैष्णवी, चामुण्डा,
लक्ष्मी, वाराही, कौमारी।
अनेक रूप हैं, एक तू माता,
तू ही जग की पालनहारी॥
महिषासुर का दर्प मिटाया,
शुम्भ-निशुम्भ को धूल चटाया।
चण्ड-मुण्ड का अंत किया माँ,
मधु-कैटभ का मान मिटाया॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे सौ आठ नाम हैं पावन,
जपते ही बनते बिगड़े काम॥
कन्या, युवती, माता रानी,
हर छवि तेरी अति कल्याणी।
कालरात्रि हो या कात्यायनी,
महिमा तेरी जग से निराली॥
धन-धान्य और सुख-संपत्ति दे,
भर दे खुशियों से घर-द्वार।
सिद्धि मिले और मुक्ति मिले माँ,
कर दे भवसागर से पार॥
जो भी तेरा नाम पुकारे,
उसके कष्ट मिटाती हो।
जो श्रद्धा से शीश झुकाए,
उसकी झोली भर जाती हो॥
जय माँ दुर्गा, जय जगदम्बे,
जय-जय अम्बे, माँ सुखधाम।
तेरे चरणों में शीश झुकाएँ,
जय हो अम्बे, जय माँ भवानी॥
- गौतम झा
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