शिवरक्षा – एक भक्तिगीत

शिवरक्षा – एक भक्तिगीत

जब जीवन में भय, संकट और अंधकार घेर लें, तब महादेव का स्मरण ही सबसे बड़ा संबल और उनकी कृपा ही सबसे बड़ा रक्षा-कवच बन जाती है।

शिवरक्षा 

हे महादेव, करुणामय,
तेरा ही है संसार,
तेरी कृपा से चलती सांसें,
तू ही जीवन का आधार।

गौरी संग तू बैठा है,
शीतल चाँद ललाट,
गंगा बहे तेरी जटा में,
तेरे चरणों में प्रभात।

तेरी दृष्टि से ज्योति बहे,
तेरी वाणी सच्ची बात,
तेरे नाम से मिटे अंधेरा,
तेरे भाव से जन विख्यात।

तेरा गला विष पी गया,
तूने जग का भार लिया,
तेरे कंधों पर टिकी धरा,
तेरे हाथों में जग जिया।

तेरे हृदय में शांति बसे,
तेरी चाल में धर्म,
तेरे पाँव जहाँ पड़ जाते,
वहाँ मिटे अधर्म।

जो भी नाम तेरा गाता,
उससे भय सब भागे,
तेरा कवच जो मन में धारे,
वो संकट से काहे डरे।

भूत-प्रेत सब दूर हों,
जब तेरा नाम पुकारे,
तेरे भक्तों के जीवन में,
सुख की नदियाँ भर जाये ।

हे भोलेनाथ, दयालु देव,
हम सब तेरे द्वार,
तेरी रक्षा में हम जीएँ,
तू ही जीवन का सार।

-गौतम झा

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