मूर्खता की पहचान – सोच का आईना

मूर्खता की पहचान – सोच का आईना

"मूर्खता की पहचान"

मूर्खता अनपढ़ होने से नहीं,
विचारों की दिशा से पहचानी जाती है,
ज्ञान किताबों में नहीं बसता,
वह तो आचरण में निखरती जाती है।

बिल्ली के कटे रास्ते पर ठहर जाने वाला,
भय से नहीं, अंधविश्वास से बंधा है,
पर चौक पर लाल सिग्नल लांघ जाने वाला,
असली अंधकार में उलझा हुआ खड़ा है

शिक्षा यदि केवल डिग्रियों में सिमट जाए,
तो विवेक भी दीवारों में कैद हो जाता है,
समझ वही, जो समाज का दीप बने,
और हर निर्णय में उजियारा लाता है।

मूर्ख वह नहीं जो जानता नहीं,
मूर्ख वह है जो सोचता नहीं,
ज्ञान का मापदंड शब्द नहीं
बल्कि जिम्मेदारी का बोध है वही।

 -गौतम झा

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