कुंजिका माँ की आरती-भजन: जय माँ चामुण्डा, जय माँ अम्बे

कुंजिका माँ की आरती-भजन: जय माँ चामुण्डा, जय माँ अम्बे

माँ चामुण्डा और माँ अम्बे की महिमा को समर्पित यह भक्तिमय आरती-भजन श्रद्धा, शक्ति और माँ की कृपा का भावपूर्ण गुणगान है।

जय माँ चामुण्डा, जय माँ अम्बे

जय जय माँ चामुण्डा, जय जय माँ अम्बे,
कुंजिका के नाम से कटें सब क्लेश, अम्बे।
शिव ने गौरी को जो रहस्य सुनाया,
उस नाम में माँ, तेरा ही बल समाया॥

शिव बोले पार्वती से, सुनो देवी मेरी बात,
गुप्त मंत्र है ऐसा, जो बदले हर हालात।
न कवच, न अर्गला, न कीलक की दरकार,
बस कुंजिका के पाठ से खुल जाए माँ का द्वार॥

तू रुद्ररूपिणी माता, तू ही मधु-कैटभ संहारी,
महिषासुर मर्दिनी तू, शुम्भ-निशुम्भ पर भारी।
सृष्टि भी तुझसे उपजे, तू ही पालनहारी,
हर बीज में तेरा वास, तू ही शक्ति सारी॥

काली बन संकट काटे, भैरवी बन रक्षा करे,
वाणी की देवी बनकर मन में उजियारा भरे।
चण्ड-मुण्ड का नाश करे, वर देती है चामुण्डा,
भक्तों को अभय देती, मिटाती हर अंधियारा॥

जाग जा माँ, जाग जा, मेरा जप सफल कर दे,
शब्द-शब्द में प्राण भर, भक्ति में बल भर दे।
बिन कुंजिका के जप तो, वन में रोने जैसा,
श्रद्धा से जो पाठ करे, पाए सुख हमेशा॥

यह रहस्य अनमोल है, हर किसी को न बताना,
भक्त जो सच्चा हो, उसी को यह सिखाना।
भाव से जो गाएगा, माँ उसकी लाज रखेगी,
हर बाधा, हर संकट में माँ ढाल बनेगी॥

जय माँ दुर्गे, जय माँ काली, जय जय माँ जगदम्बे,
शरण पड़ा हूँ द्वार तेरे, कृपा करो माँ अम्बे।

॥ ॐ तत्सत् ॥

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