चुप्पी

चुप्पी

चुप्पी

चुप्पी
चुप्पी अच्छी है।

अल्प है, फिर भी विशेष है,
स्वच्छ सब संदेश है।
कुछ क्षण का अवशेष है,
निराधार नहीं इसका भेष है।

चुभती है,
चिल्लाती है,
मगर कुछ बताती नहीं।
गंभीरता का आलम है,
लेकिन मन का बालम है।

शब्दों का यह अंत है,
मगर विचारों का अनंत है।
पतझड़-सी ख़ामोशी में,
छिपा हुआ एक वसंत है।

यह अनकहा-सा राग है,
भीतर जलती आग है।
सफ़ेद कोरी चादर पर,
यह मिटता नहीं वो दाग़ है।

शोर के पीछे भागती,
दुनिया सोतीयह जागती।
सत्य के इस आईने से,
परछाईं भी नहीं भागती।

थकान का यह नाम है,
मगर रूह का आराम है।
भीड़ में जो खो गया,
उसका ही तो यह धाम है।

-गौतम झा

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1 Comment

G
Gunja
2 years ago
गंभीरता का आलम है, लेकिन मन का बालम है....
Wow!
InsightfulTake Team
Thank you for sharing your thoughts. We appreciate your feedback and engagement with InsightfulTake.