परेशान दुनियाँ
- Poems
- 29th August 2024
परेशान दुनिया अब मैं ख़ुद को ही ढूँढ़ने लगा हूँ,खोया हुआ कल भूलने...
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परेशान दुनिया अब मैं ख़ुद को ही ढूँढ़ने लगा हूँ,खोया हुआ कल भूलने...
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क्यों? खोने से ही कीमत का पता चलता है,जागने से हर दिन नया सवेरा होता...
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उम्मीद के रिश्ते उम्मीद पर खड़ें हैं, नतीजा सब बिखड़े हैजो होगा वो...
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बिहार का परिदृश्य बिहार भारत का एक राज्य है,तेरह करोड़ लोगों का...
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जमाना सपना ऐसा हो कि सजाने में जमाना लग जाए,सच हो जाए तो सारे सितारे...
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दिल्ली अभी दूर है दिल्ली अभी दूर है, औलिया इसी से मशहूर है,मध्यकाल का...
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अनुकूल-अनुसरण अर्थ, मान, यश गर पाना हो,तब ठाकुर ही तुम्हारा ठिकाना...
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प्रकृति का स्वरूप प्रकृति का अपना स्वरूप है,चल-अचल का अद्भुत रूप...
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राय का पहाड़ राय का पहाड़ बनते सुना है,समय का दबाव जब बढ़ा है।राय कभी...
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अधेड़ उम्र ज़िंदगी परत-दर-परत खुलती है,अधेड़ उम्र की यही विकट...
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