सर्दी की धूप
- Poems
- 1st October 2024
सर्दी की धूप सर्दी की धूप का गुनगुना गुच्छा आँगन में बिछने लगा...
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सर्दी की धूप सर्दी की धूप का गुनगुना गुच्छा आँगन में बिछने लगा...
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मानव परिदृश्य प्रकाश पुंज के प्रसार से प्रारंभ है,सूर्योदय से जीवन...
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छायादार पेड़ और सफलता पेड़ को छायादार बनने में वर्षों लगते...
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मृत्यु का भ्रम मृत्यु का अगर डर नहीं होता,पाप-पुण्य का भय नहीं...
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उलझन उलझन की हस्ती में, दोस्ती कम पड़ जाती है,बोलती है जब तन्हाई,...
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काश ऐसा होता काश! सपनों के बोल होतेधड़कनों से मेल होतेदुनियां बड़े...
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पिता की स्मृति कुछ स्मृतियाँ होती हैं बेहद प्यारी,जीवन की नींव है उन...
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Ode to Indian Culture The land where rivers flow like a grand parade,Wisdom whispers softly, in the winds that cascade.Colors of festivals paint the sky so bright,From...
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गरीबी और अमीरी का खेल गरीबी और अमीरी का जो खेल चलता हैआदमी की कीमत पर...
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दीपावली के रंग मन-भोग लगाता है कोई, पेट किसी का खाली है। मनती भारत...
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