महामानव का संकल्प: नव भारत का उदय
- Poems
- 14th April 2026
नव भारत का उदय छोड़ो रूढ़ियों की बेड़ियाँ, अब समता का उजियारा...
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नव भारत का उदय छोड़ो रूढ़ियों की बेड़ियाँ, अब समता का उजियारा...
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वक्त की दहलीज़ और एक अक्स दस साल की गर्द में कितने ही मौसम बदल...
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भगवान परशुराम धरा पर जब-जब बढ़ा अधर्म, और कांपी मर्यादा की नींव,तब...
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अक्षरों का अनंत विस्तार मौन खड़ी ये आलमारियाँ, इतिहास स्वयं...
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“नशा” हमारे नशे कड़े हैं—शराब से भी ज़्यादा,क्योंकि ये उतरते...
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मौन का अनुष्ठान मांग के सिंदूर और ललाट की उस शांत बिंदु के बीचएक...
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मुखौटे और विश्वास इतिहास साक्षी है उस छल का,जो साधु के वेश में आया...
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अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस मई की पहली सुबह है,कैलेंडर पर लाल...
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पण्य और प्रतिज्ञा प्रपंच नहीं, यह यथार्थ है—कि जग में छल का अभाव...
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तस्वीर की ओट रात के गहरे सन्नाटे में, जब सो जाता है जग सारा,एक जीव...
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