बिहार का प्रवासी: मिट्टी की लाचारी
- Poems
- 10th November 2025
बिहार का प्रवासी मिट्टी अब भी महकती है, पर मन में धुआँ भरा है,हर घर से...
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बिहार का प्रवासी मिट्टी अब भी महकती है, पर मन में धुआँ भरा है,हर घर से...
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किशोर का स्वप्न दिल्ली के गलियारों से आया एक नया नाम,रणनीति...
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#अरावली अरावली कोई पत्थर नहीं हैजो मशीनों के शोर से डर जाए,न कोई...
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मासूमियत का दहन जहाँ खेतों में उगनी थी कनक की कोमल बालियाँ,वहाँ उग...
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क्रांति-ज्योति सत्यशोधक की सहचरी, अज्ञान-तम की भोर थी,वो सिर्फ़ एक...
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पौष पूर्णिमा और बुद्ध पौष की पूर्णिमा, शीतल चाँद की आभा,इतिहास के...
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नरक निवारण चतुर्दशी माघ की ठिठुरन में जागी भोर,मिथिला की गलियों में...
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मौनी अमावस्या माघ मास की निस्तब्ध रजनी,जब नभ में चंद्र न दिखे, मौन...
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When Archie’s Brought February to Life: Valentine’s Day in India Before the malls were washed in red,Before long-stemmed roses ruled the street,Love in India...
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छत्रपति शिवाजी सह्याद्रि की ढलानों परजब धुंध उतरती थी,तब एक...
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