दीवाली में रेल यात्रा
- Poems
- 20th October 2025
दीवाली में रेल यात्रा पटरी पे रेंगती रेल थकी-सी,कचरे में लिपटी,...
Read Full →
दीवाली में रेल यात्रा पटरी पे रेंगती रेल थकी-सी,कचरे में लिपटी,...
Read Full →
भाई दूज दीयों की लौ में मुस्कान झलके,भाई दूज फिर आ ही गई।राखी के धागे...
Read Full →
नहाय-खाय तालाबों में, नदियों में, सागर के जल में स्नान किया,भक्ति ने...
Read Full →
खरना आज खरना है, छठ का दूसरा दिन आया,मन-तन की पवित्रता का एहसास...
Read Full →
छठ पर्व न आरती की गूँज यहाँ, न पटाखों का शोर,दीप जलें तो भक्ति से, न लोभ...
Read Full →
मनुष्य और वृक्ष धरती की गोद में दोनों जमे हैं समान,एक रस पीता जल का,...
Read Full →
बैंगन-वृक्ष यह तना, यह ऊँचा विस्तार — क्या केवल बैंगन है?या वर्षों...
Read Full →
लौह पुरुष नडियाद में जन्म लिया, एक साधारण किसान परिवार में,वल्लभ नाम...
Read Full →
देव प्रबोधिनी एकादशी चार मास की निद्रा में, हरि शांति सागर में...
Read Full →
पूर्णिमा के गगन में नानक का नूर गंगा के तट पर चाँद खिला,जगमग दीपक...
Read Full →