ताल्लुक: अनकहे रिश्तों और सच्ची दोस्ती पर हिंदी कविता
- Poems
- 2nd August 2026
ताल्लुक वह जो बिन कहे सुन लेता है,खामोशी के पन्नों पर लिखी...
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ताल्लुक वह जो बिन कहे सुन लेता है,खामोशी के पन्नों पर लिखी...
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मुझे ऐसा तिरंगा चाहिए आज फिर तिरंगाघर की छत पर लहरा रहा है।हवा में...
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डिजिटल शोर कंधे पर भारी टोकरी,उसमें समाया “जी.डी.पी.”,उफनती...
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पर्दे के पीछे की हकीकत पर्दों के पीछे हकीकत,कब तक छिपाओगे...
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झूठे फ़ैसले न गोदी अलग है, न वैकल्पिक अलग,यहाँ एक ही धुन में बजता है...
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