भूख का विद्रोह: रीढ़-विहीन व्यवस्था के विरुद्ध अनशन
- Poems
- 16th July 2026
भूख का विद्रोह श्रम की पावन बूँदें जब, बाज़ारों में नीलाम हुईं,तब...
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भूख का विद्रोह श्रम की पावन बूँदें जब, बाज़ारों में नीलाम हुईं,तब...
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जंतर-मंतर और एक अडिग इंसान मुझे एसी कमरों में बैठकर नीतियों पर बहस...
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भूख का शंखनाद जिस लद्दाख की बर्फ़ से निकला,वह शांत मगर तूफ़ान...
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हम बोलेंगे! यह तय है, अब हम बोलेंगे,तुम लाख लगाओ पहरे,हम सत्य की आवाज़...
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सीमा के पार यदि तुम रात हो,तो मैं तुम्हारे लिए एक तारा बन जाना...
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तुमसे ही ऋतु, तुमसे ही प्रकाश वर्षों नेहमारे आँगन मेंऋतुओं के...
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लाठी लोकतंत्र जब लाठी लोकतंत्र से बड़ी हो जाए,तो समझो समय घायल...
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मजबूरी ऑफ़ गोदी मीडिया प्रोफेशनल्स कलम ने आईने से पूछा,"क्या सचमुच...
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गुरु पूर्णिमा आज चाँद पूरा है,पर उजाला उसका अपना नहीं।वह भी किसी...
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मुलाक़ात उम्र की चालीसवीं सीढ़ी पर आकर,एक ख़ामोश सा ठहराव मिलता...
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