प्रकृति का चुनाव
- Poems
- 8th October 2025
जब सृष्टि ने अपना प्रिय चुना एक दिन इजाज़त मिली सबकोअपना प्रिय...
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जब सृष्टि ने अपना प्रिय चुना एक दिन इजाज़त मिली सबकोअपना प्रिय...
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भारतीय नारी एक युग था, जब अँधेरा और रसोई था उसका संसार,आँच की साक्षी,...
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पिघलती बर्फ़ हिमालय की गोद में,एक उजली चुप्पी थी —जहाँ बर्फ़, नींद...
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शिवरक्षा हे महादेव, करुणामय,तेरा ही है संसार,तेरी कृपा से चलती...
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"मूर्खता की पहचान" मूर्खता अनपढ़ होने से नहीं,विचारों की दिशा से...
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सृष्टि का पहला रंग वह खड़ी है — धूप के हृदय में,जहाँ रेत भी झुककर...
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ख़ुद से मुलाक़ात कभी-कभी मैं ख़ुद ही से सवाल करता हूँ,कि क्यों मैं आज...
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दादा और पोता दादा की आँखों में वर्षों की धूप है,पोते की हँसी में सुबह...
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भस्म और भ्रम लंका नहीं बचा पाया शीश चढ़ाने वाला,किस वहम में जी रहे...
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समानांतर दुनिया सोशल मीडिया की चौखट पर,हर चेहरा मुस्कान में लिपटा...
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