अंतिम पड़ाव
- Poems
- 29th April 2024
अंतिम पड़ाव अगर मूल्य जुड़ गया हो,स्नेह भी पक गया हो,संवेदना शुष्क हो...
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अंतिम पड़ाव अगर मूल्य जुड़ गया हो,स्नेह भी पक गया हो,संवेदना शुष्क हो...
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मौन-संवेदना मौन-संवेदना की अभिव्यक्ति,निश्छल एवं पवित्र....कोयल की...
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ख्वाब कुछ ख्वाबों को मैंने सबक सिखाया,सबको एक गाँठ में बाँध के...
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कैसा होगा जीवन मैं सोचता हूँ प्रतिपलकैसा होगा यह जीवन? सुख और...
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अभिन्न-विभिन्न बातें तो विभिन्न है,सवाल भी अभिन्न है। गुण तो गुमनाम...
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एक वेदना ज़िन्दगी की तपिश में भींगता ‘मौन’,बाचाल और मुखर...
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खिचड़ी दो साथ पके एक पात्र में,स्वाथ्य लाभ के अर्थात में। सुगम,...
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Resilience in Paradox Life offers many excuses to sit idle,But one strong reason to rise is being a go-getter.Failures haunt my every venture,Yet hopes persist, stirring...
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हरे राम की दुविधा बदलाव प्रकृति है,सतत एवं सहज है।। प्रगति का...
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तुम याद आते हो तुम याद आते हो—शाम के सितारों में नहीं,तेज़ दोपहरी...
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