बेटी
- Poems
- 18th April 2024
बेटी सीप मोती सी मेरी बेटी,नदी सी अल्हड़ और पंछी सी चंचल । सावन सी...
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बेटी सीप मोती सी मेरी बेटी,नदी सी अल्हड़ और पंछी सी चंचल । सावन सी...
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नाज है मुख्तसर सी बात है,मुझे तुम पर नाज है,अब यही जज़्बात है,कपकपी से...
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डिजिटल इश्क तुम्हारी उम्मीद रोज़-रोज़ जलती है…फिर भी ख़ाक नहीं...
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नारी श्रेष्ठ जीव का अंतर प्रत्यक्ष है,मानवता का मूल्य पृथक है,सत्य...
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बातों-बातों में नशे की बात हो,और ज़िक्र चाय का न हो—संगीन है। फूलों...
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चाँद में गड्ढा रजनी के चाँद की धरा को देखा.पाया उजालों के शहर में भी...
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एक मुश्किल मेरे दरख़्त के शाखों पर, पीले पत्तों के झुरमुट...
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नारी- विशेष तुम्हारी नायनशाला, ख़्वाबों की मधुशाला थी।वक़्त की...
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एक नदी -दो किनारे एक नदी के दो किनारे,समानांतर अपने पथ पर...
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सुख- दुख आधा सुख, आधा दुख,जीवन चांद सा है कुछ–कुछ। दिन के दहशत से...
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