बिहार का सफर: एक स्वप्न और पदयात्रा
- Poems
- 15th November 2025
किशोर का स्वप्न दिल्ली के गलियारों से आया एक नया नाम,रणनीति...
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किशोर का स्वप्न दिल्ली के गलियारों से आया एक नया नाम,रणनीति...
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बिहार का प्रवासी मिट्टी अब भी महकती है, पर मन में धुआँ भरा है,हर घर से...
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पूर्णिमा के गगन में नानक का नूर गंगा के तट पर चाँद खिला,जगमग दीपक...
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देव प्रबोधिनी एकादशी चार मास की निद्रा में, हरि शांति सागर में...
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लौह पुरुष नडियाद में जन्म लिया, एक साधारण किसान परिवार में,वल्लभ नाम...
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बैंगन-वृक्ष यह तना, यह ऊँचा विस्तार — क्या केवल बैंगन है?या वर्षों...
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मनुष्य और वृक्ष धरती की गोद में दोनों जमे हैं समान,एक रस पीता जल का,...
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छठ पर्व न आरती की गूँज यहाँ, न पटाखों का शोर,दीप जलें तो भक्ति से, न लोभ...
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खरना आज खरना है, छठ का दूसरा दिन आया,मन-तन की पवित्रता का एहसास...
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नहाय-खाय तालाबों में, नदियों में, सागर के जल में स्नान किया,भक्ति ने...
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