नारी- विशेष
- Poems
- 26th April 2024
नारी- विशेष तुम्हारी नायनशाला, ख़्वाबों की मधुशाला थी।वक़्त की...
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नारी- विशेष तुम्हारी नायनशाला, ख़्वाबों की मधुशाला थी।वक़्त की...
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एक मुश्किल मेरे दरख़्त के शाखों पर,पीले पत्तों के झुरमुट में,अलसाया...
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चाँद में गड्ढा रजनी के चाँद की धरा को निहारा,तो पाया,उजालों के विराट...
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बातों-बातों में नशे की बात हो,और ज़िक्र चाय का न हो—संगीन है। फूलों...
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नारी श्रेष्ठ जीव का अंतर प्रत्यक्ष है,मानवता का मूल्य पृथक है,सत्य...
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डिजिटल इश्क तुम्हारी उम्मीद रोज़-रोज़ जलती है…फिर भी ख़ाक नहीं...
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नाज़ है मुख़्तसर सी बात है,मुझे तुम पर नाज़ है,अब यही जज़्बात...
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बेटी सीप-मोती सी मेरी बेटी,नदी सी अल्हड़, पंछी सी चंचल। सावन सी छन-छन...
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एक ही बात दिन-रात एक ही बात,रग-रग में है आपका उत्पात। क्षण-क्षण का यह...
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हवा पर नाम कभी अनकहे रिश्तों की क़दर करो,सामने रहकर कुछ असर करो। समझ...
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