ख़ुद से मुलाक़ात
- Poems
- 18th October 2025
ख़ुद से मुलाक़ात कभी-कभी मैं ख़ुद ही से सवाल करता हूँ,कि क्यों मैं आज...
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ख़ुद से मुलाक़ात कभी-कभी मैं ख़ुद ही से सवाल करता हूँ,कि क्यों मैं आज...
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सृष्टि का पहला रंग वह खड़ी है — धूप के हृदय में,जहाँ रेत भी झुककर...
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"मूर्खता की पहचान" मूर्खता अनपढ़ होने से नहीं,विचारों की दिशा से...
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शिवरक्षा हे महादेव, करुणामय,तेरा ही है संसार,तेरी कृपा से चलती...
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पिघलती बर्फ़ हिमालय की गोद में,एक उजली चुप्पी थी —जहाँ बर्फ़, नींद...
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भारतीय नारी एक युग था, जब अँधेरा और रसोई था उसका संसार,आँच की साक्षी,...
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जब सृष्टि ने अपना प्रिय चुना एक दिन इजाज़त मिली सबकोअपना प्रिय...
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स्त्री ‘स्त्री’, ‘पृथ्वी’ के हृदय पर किया गया,‘ईश्वर’ का...
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शरद पूर्णिमा आज की रात, चाँद नहीं — कोई साधक है,जो अंबर पर दीपक-सा...
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नीलकंठ अमृत-नील पंख फैलाए, नभ में करता गान,दशहरे पर शुभ बनाता, जीवन का...
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