किसान
- Poems
- 13th April 2024
किसान सुबह गुरूर में था, दोपहर ने उसे चूर कर दिया,धरती के पुत्र किसान...
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किसान सुबह गुरूर में था, दोपहर ने उसे चूर कर दिया,धरती के पुत्र किसान...
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भ्रमजाल हजार बोतलों का हिसाब, तुम्हारी नज़रों की धार में है,खुल्द...
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अनूठी ख़ामोशी तुम्हारी ख़ामोशी अनूठी है, जैसे किसी पोटली में...
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गलत-सही अगर सवाल ही गलत है,तो फिर जवाब का क्या मतलब है? किसी का होना...
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मसला खुशबू हवा में बिखेर कर,मसला ये फूल कर गया। जो फिक्रमंद थे वसंत...
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भाव का अलाव शाख पर बैठा, मैं शजर देख रहा हूँ,तेरे कसर का होनेवाला असर...
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कमाल करो अगर बेमिसाल हो, तो कमाल भी करो,रोज़मर्रा के सवाल पर बवाल न...
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विरोधाभास भूलना आसान है,तो याददाश्त को क्यों अभिमान है? गिरना आम...
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कभी-कभी - तुम और मैं कभी तुम मेरे दरीचे से मुझे ढूंढों,और फिर, जमाना...
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अभेद्य-अनुराग अनन्त आकांक्षाओ के आकाश में,अघटित अल्प अतीत अनुराग...
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