कमाल करो
- Poems
- 10th April 2024
कमाल करो अगर बेमिसाल हो, तो कमाल भी करो,रोज़मर्रा के सवाल पर बवाल न...
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कमाल करो अगर बेमिसाल हो, तो कमाल भी करो,रोज़मर्रा के सवाल पर बवाल न...
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विरोधाभास भूलना आसान है,तो याददाश्त को क्यों अभिमान है? गिरना आम...
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कभी-कभी - तुम और मैं कभी तुम मेरे दरीचे से मुझे ढूंढों,और फिर, जमाना...
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अभेद्य-अनुराग अनन्त आकांक्षाओ के आकाश में,अघटित अल्प अतीत अनुराग...
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विडंबना ईमानदारी और तिरस्कार—दोनों अक्सर साथ चलते हैं। शक है?तो...
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Maturity When silence begins to speak,you become mature. When you embrace differences without judgment,you become mature. When emotions no longer rule you,you become...
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