अनुकूल-अनुसरण
- Poems
- 12th September 2024
अनुकूल-अनुसरण अर्थ, मान, यश गर पाना हो,तब ठाकुर ही तुम्हारा ठिकाना...
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अनुकूल-अनुसरण अर्थ, मान, यश गर पाना हो,तब ठाकुर ही तुम्हारा ठिकाना...
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प्रकृति का स्वरूप प्रकृति का अपना स्वरूप है,चल-अचल का अद्भुत रूप...
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राय का पहाड़ राय का पहाड़ बनते सुना है,समय का दबाव जब बढ़ता है।राय...
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अधेड़ उम्र ज़िंदगी परत-दर-परत खुलती है,अधेड़ उम्र की यही विकट...
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सर्दी की धूप सर्दी की धूप का गुनगुना गुच्छा आँगन में बिछने लगा...
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मानव परिदृश्य प्रकाश-पुंज के प्रसार से प्रारंभ है,सूर्योदय से जीवन...
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छायादार पेड़ और सफलता पेड़ को छायादार बनने में वर्षों लगते...
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मृत्यु का भ्रम मृत्यु का अगर डर नहीं होता,पाप-पुण्य का भय नहीं...
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उलझन उलझन की हस्ती में, दोस्ती कम पड़ जाती है,जब तन्हाई बोलती है,...
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काश ऐसा होता काश! सपनों के बोल होते,धड़कनों के मेल होते,दुनियां बड़े...
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