अंततः... एक शाश्वत सत्य
- Poems
- 7th July 2026
एक शाश्वत सत्य अंततः राम त्याग ही देते हैं सीता को,कर्तव्य की वेदी...
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एक शाश्वत सत्य अंततः राम त्याग ही देते हैं सीता को,कर्तव्य की वेदी...
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सुल्तान-ए-धुआँ ताज पहनकर बैठा है,पर चेहरों पर धूल बहुत,वादों की ऊँची...
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हर रिश्ता प्रेम नहीं होता हर बारदिल का धड़कना हीप्रेम नहीं...
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कुछ लोग घर नहीं होते कुछ लोगघर नहीं होते, फिर भीउनसे मिलकरमन लौट आता...
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भूख का विद्रोह श्रम की पावन बूँदें जब, बाज़ारों में नीलाम हुईं,तब...
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जंतर-मंतर और एक अडिग इंसान मुझे एसी कमरों में बैठकर नीतियों पर बहस...
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भूख का शंखनाद जिस लद्दाख की बर्फ़ से निकला,वह शांत मगर तूफ़ान...
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हम बोलेंगे! यह तय है, अब हम बोलेंगे,तुम लाख लगाओ पहरे,हम सत्य की आवाज़...
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सीमा के पार यदि तुम रात हो,तो मैं तुम्हारे लिए एक तारा बन जाना...
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तुमसे ही ऋतु, तुमसे ही प्रकाश वर्षों नेहमारे आँगन मेंऋतुओं के...
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