माँ काली: विनाश में सृजन की ज्योति
- Poems
- 24th August 2025
माँ काली वह काली है—जिसकी हँसी में बिजली गरजती है,जिसकी आँखों में...
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माँ काली वह काली है—जिसकी हँसी में बिजली गरजती है,जिसकी आँखों में...
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वेदों की ज्योति अनादि काल की गूँज है वेद,जहाँ ऋषियों ने सुनी थी...
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मैं ही शिव हूँ मैं असीम आकाश की गहराई हूँ,मैं हर श्वास की परछाईं...
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गणेश चतुर्थी सज गए पंडाल, चमक उठा बाज़ार,ढोल-नगाड़ों में डूबा...
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The Dowry Flame of Nikki O India, land of golden dawns and shadowed nights,Why do your daughters burn in hearths of blighted rites?In Greater Noida’s streets, a young heart...
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मिथिला-गाथा जनकपुर की पुण्यभूमि, जहाँ जानकी उत्पन्न हुई,यज्ञ-अग्नि...
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सहकर्मी रूपवती वह दफ़्तर की रोशनी में नहीं,जैसे चाँद की शीतल धारा...
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नेपाल की ज्वाला मत पूछो, क्यों धधक उठीं गलियाँ काठमांडू की,युवा रक्त...
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वैशाली वैशाली—जहाँ धरती पर इतिहास मुस्कुराता है,गंगा की पावन...
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हिन्दी चौदह सितम्बर को सजती हैं सभाएँ,फीते कटते हैं, भाषणों की...
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