अनुकूल-अनुसरण
- Poems
- 12th September 2024
अनुकूल-अनुसरण अर्थ, मान, यश गर पाना होतब ठाकुर तुम्हारा ठिकाना...
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अनुकूल-अनुसरण अर्थ, मान, यश गर पाना होतब ठाकुर तुम्हारा ठिकाना...
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दिल्ली अभी दूर है दिल्ली अभी दूर है, औलिया इसी से मशहूर हैमध्यकाल का...
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जमाना सपना ऐसा हो कि सजाने में जमाना लग जाएसच हो जाए तो सारे सितारे...
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बिहार का परिदृश्य बिहार भारत का एक राज्य हैतेरह करोड़ लोगों का...
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उम्मीद के रिश्ते उम्मीद पर खड़ें हैं, नतीजा सब बिखड़े हैजो होगा वो...
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क्यों? खोने से कीमत का पता चलता हैजागने से सदा दिन बनता रहता हैपाने...
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परेशान दुनियाँ अब मैं खुद को ही ढूंढने लगा हूँखोया हुआ कल्ह भूलने...
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जय महाकाल ब्रह्मांड जिसके नेत्रों में,भृकुटियों में काल हो,देवों...
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जज्बातों का मरहम लोग कहते हैं वक़्त के साथ तो बदलना ज़रूरी...
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