राधा केवल एक नाम नहीं, वह प्रेम की अनंत प्यास है। श्याम केवल एक व्यक्तित्व नहीं, वह उस प्यास का मौन उत्तर हैं।
राधा–श्याम
सागर-मंथन की मोहिनी,
अमृत-कलश की संगिनी,
भाव-भुवन की मधुर रागिनी,
वर्तिका-सी ज्योति, दामिनी।
राधा की नैसर्गिक काया,
श्याम के मन को ऐसी भाया,
फिर प्रेम की कैसी यह माया,
जिसमें अनंत अनुराग समाया।
स्नेह-भरी इस गागर को,
श्याम-सुंदर ने अपने सागर में,
रास रचाकर, रंग सजाकर,
मुट्ठी-बंद जुगनू-सा अपना बनाया।
कथा का अंत बड़ा विकल,
दोनों रह जाते हैं व्याकुल।
राधा का संदेश क्या है?
श्याम का उपदेश क्या है?
युगों की अभिलाषा है राधा,
तृष्णा की भाषा है राधा,
मन की निष्कलुष भोर है राधा,
संगीत और लय का छोर है राधा।
सुख की क्या कोई सीमा है?
इच्छा की कहाँ कोई बीमा है?
अधूरी आस ही तो परिणय है,
संपूर्णता में कहाँ विनय है।
— गौतम झा
राधा–श्याम
सागर-मंथन की मोहिनी,
अमृत-कलश की संगिनी,
भाव-भुवन की मधुर रागिनी,
वर्तिका-सी ज्योति, दामिनी।
राधा की नैसर्गिक काया,
श्याम के मन को ऐसी भाया,
फिर प्रेम की कैसी यह माया,
जिसमें अनंत अनुराग समाया।
स्नेह-भरी इस गागर को,
श्याम-सुंदर ने अपने सागर में,
रास रचाकर, रंग सजाकर,
मुट्ठी-बंद जुगनू-सा अपना बनाया।
कथा का अंत बड़ा विकल,
दोनों रह जाते हैं व्याकुल।
राधा का संदेश क्या है?
श्याम का उपदेश क्या है?
युगों की अभिलाषा है राधा,
तृष्णा की भाषा है राधा,
मन की निष्कलुष भोर है राधा,
संगीत और लय का छोर है राधा।
सुख की क्या कोई सीमा है?
इच्छा की कहाँ कोई बीमा है?
अधूरी आस ही तो परिणय है,
संपूर्णता में कहाँ विनय है।
— गौतम झा
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